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Shayari directy from Hearts

Hindi Shayari

My shayri

लगता है इश्क़ को इश्क़ की नज़र लग गई….
जैसे खुशनुमा मौसम में ख़िज़ा लग गई।

अजीब है इस सितमगर दुनियां का दस्तूर…
जो किसी ने न दी वो बददुआ लग गई।

कलमकार

जिस दिन मेरी कलम चलती है ,
मेरे शब्द उस दिन रुक जाते है ,
कलम , शब्द अगर एक साथ चल दे ,
तो शायद कलमकार हो जाऊं !

Nishan

तुम भी देख ले इन जख्मो के निशानों को…
जो तुमने मुझे अपने करारे शब्दों से दिये थे…
वक़्त के साथ तुम तो हमें भूल गए…
ओर जख्म भी भर गए…
पर ऐ जख्म भी तेरे यादों की तरह अपने निशान पिछे छोड़ चलें गए…

Rose…

Mohabat

बेचैन ये सफर जीन्दगी का
मुश्किलो के बिना जीन्दगी, जीन्दगी नही होती।
महोबत के बिना जीन्दगी,हंसी नही होति।
जीन्दगी जियो महोबत से,बिना महोबत जीन्दगी किसी के काम की नहि होती।

Mohabat

बेचैन ये सफर जीन्दगी का
मुश्किलो के बिना जीन्दगी, जीन्दगी नही होती।
महोबत के बिना जीन्दगी,हंसी नही होति।
जीन्दगी जियो महोबत से,बिना महोबत जीन्दगी किसी के काम की नहि होती।

Na ati tum

ना शाख़ से तोड़ इस पत्ते को
वो तो पतझड़ में ख़ुद ब ख़ुद टूट गया होता
कलम से बना तो लेते तेरी तस्वीर ए दरक्षा
पर आँखे मूँद कर जब देखते हे केनवास पर तेरी तश्वीर ख़ुद ब ख़ुद उभर गयी होती
आये तो हो तुम फिर से दोहरा के वो बातें हमारा दिल तोड़ जाने को
गर ना आते दिल तो ख़ुद ब ख़ुद टूट गया होता

अजनबी

तुम्हारी ये निगाहें ~ जो जिगर तक उतर जाती हैं दिल से होकर ~ 
इन निगाहों के परे ~ तुम्हारा अपना भी तो दिल अपना भी तो जिगर होगा ~ 
तुम्हारी अपनी कहानियाँ ~ अपनी रंजीशे होंगी ~ 
तुम्हारे अपने सपने ~ अपनी ख्वाईशें होंगी ~ 
तुम्हारी कहानियों को मैं सुनना चाहु ~ तो क्या ये ना-पाक होगा? 
तुम्हारी ख्वाईशों को मैं पढ़ना चाहु ~ तो क्या ये ना-पाक होगा? 
तुम्हारी निगाहों-अदाओं से ~ चैन मेरे जिगर को मिलता हैं ~ 
तुम्हारी रूह को मिलने से अगर ~ सुकून मेरी रूह को मिल जाये ~ तो क्या ये ना-पाक होगा? 
ज़माना ज़ालिम हैं ~ समझवालो को गुस्ताख़ ~ और नादानो को  पाक कहता  हैं ~ 
तुम अपने ज़मीर से मगर पूछो जरा ~ 
अक्स की खूबसूरत बातें ज़ुबान से बयान कर डालो ~ तो क्या ये ना-पाक होगा?

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LIFE SHAYARI

🍂
मैं ज़िन्दा हूँ ये ○मुश्तहर कीजिए,
मिरे क़ातिलों को ख़बर कीजिए!

अब तो उतनी भी मयस्सर नहीं मयखाने में,
जितनी हम छोड़ दिया करते थे पैमाने में,
छलक जाने दो पैमाने
मैखाने भी क्या याद रखेंगे,
आया था कोई दिवाना
अपनी मोहब्बत को भुलाने।

चलते कदमो को रुकने का हुनर नहीं आया
सभी मंजिले निकल गयी पर घर नहीं आया।

मुस्कुराना उसकी आदत ना हो

किसी कि चाहत में इतने पागल ना हो,
हो सकता है वो आपके क़ाबिल ना हो,
उसकी मुस्कुराहट को मोहब्बत ना समझना,
कहीं ये मुस्कुराना उसकी आदत ना हो ।।

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