DilseShayari.com

Shayari directy from Hearts

freedom

Aazadi

हूँ तो में पागल परिंदा ।
उड़ता हूँ में पागलपन में ॥

दम घुटता हैं मेरा ।
जब करते हो कैद पिंजरे में ॥

गलती से भी छु न लेना।
जफटूँगी पलट के ॥

फिर देखते रहना जी भर के ।
मायूसी से यह लाड़ से ॥

,

Page 1 of 11